Saturday, 22 February 2014

कविताएँ


 

1

बिटिया

चाहता तो मैं यही हूँ

कि मेरी सारी अच्छाइयाँ

हों बिटिया के अंदर

बुराइयाँ बाहर

 

कि बिटिया माँ पर गई हो !!

2

विस्तार


बिक रहे हैं

पास-पड़ोस के खेत

छोटे-छोटे टुकड़ों में

आसमान छूती कीमतों पर

इन्हीं खेतों को कभी खरीदा था

बिल्डरों ने कौड़ियों के मोल

 

सिमट रहा है

पानी

सिमट रही है

हवा

सिमट रहे हैं

बरगद

नीम

बबूल

आकाश सिमट रहा है

शहर का हो रहा है विस्तार !!
3

पहली कक्षा का बच्चा


वह बच्चा

कक्षा पहली का

पहुँच नहीं पाया

अपनी कक्षा में

अब तक

दरअसल

खोज रही है

उसकी आँखें

धरती पर कोई नई चीज़

जो काम की हो उसके

मसलन –

चकमक पत्थर

लकड़ी का एक

अदद टुकड़ा -

चिकना और बेलनाकार

एक पत्ती सुनहली !!

4

बच्चे


एक

बच्चे

लड़ते हैं

दोस्त बनते हैं

दोस्त बनते हैं

लड़ते हैं

फिर दोस्त बन जाते हैं

 

बड़ेs

झगड़ते हैं झगड़ते हैं

और झगड़ते रहते हैं !!

 

दो


बच्चे

भागते हैं सरपट

एक दूसरे के पीछे

छुआ-छुई खेलते हैं

खेलते हैं लुका-छिपी

गिरते हैं-उठते हैं

उठते हैं-गिरते हैं

रोते हैं-हँसते हैं

फिर भागने लग जाते हैं

हारते हैं.....ताली बजाते हैं

ताली बजाते हैं.....जीत जाते हैं


बड़े

भागते हैं डावांडोल

भागते हैं और टांग खींच कर

गिरा देते हैं –

गिरा देते हैं और आगे बढ़ जाते हैं !!

 

तीन


बच्चे जल्दी नहीं थकते

और जब थककर चूर हो जाते हैं

आड़े-तिरछे

गोद, फर्श, बिस्तर

कहीं भी-कभी भी

लम्बी तान के सो जाते हैं

उन्हें देखो

नींद में हँसते नज़र आते हैं



बड़े

नींद में जागते रहते हैं !!

 

चार      


बच्चे रोते हैं चीख-चीख कर

दहाड़े मारकर         

भींगे होते हैं दोनों गाल

पलकें

नाक

 

बुजुर्ग रोते हैं तो

उनके आँसू गालों को गीला नहीं करते

किसी को दिखाई नहीं पड़ती

चश्में की मोटी काँचके पीछे झिलमिलाती आँखें

सुनाई नहीं पड़ती कोई आवाज़ ...

5

राज्य का जन्म


तेलंगाना

उत्तराखंड

कज़ाकिस्तान

या साउथ सुडान

बनना एक नए राज्य का

होना जन्म किसी नए देश का

लम्बे प्रसव के बाद –

खुश होता है

आदमी

नाचता है

बच्चे को बैठाकर काँधे पर

बजाता है तालियाँ

पटाखे फोड़ता है

ढाक-ढोल नगाड़ों के शोरोगुल में

अबीर और गुलाल से

ढके हुए चेहरे – बाल

 

उम्मीदें आदमी की

बदलते ही करवट समय के

खाने लगती हैं हिचकोले

रस्सियों पर लटके

बाँस के बने पुल की तरह

आदमी नाचना भूल जाता है

भूल जाता है

सौंदर्य रंगों का !!

6

डाक्टर मेहता

अकेली नहीं है

डाक्टर मेहता

पूरा मोहल्ला उनका अपना है

सगे हैं मोहल्ले के बच्चे

मोहल्ले की बहुएँ

बहुएँ हैं उनकी

 

मोहल्ले के दामादों

और नाती – पोतों ने

हाल ही मनाया

पचहत्तरवां जन्म दिन...

 

बीमार थी डाक्टर मेहता गंभीर

पति की मौत से पहले

डाकटरों ने बताया –

आँतों का संक्रमण

इधर-उधर ईलाज के बाद

ठीक हुई डाक्टर मेहता

अपनी ही दवाइयों से

जिन्हें वे कहती है –

सिम्प्टोमेटिक ट्रीटमेंट

पर डाक्टर मेहता बचा न पाई पति को अपनी

बस एक झटका आया ज़ोरदार

और टूट गई साँसें

छूट गया पचास बरसों का साथ...

 

कहते हैं मोहल्ले के लोग

डेंगू डरता है

डाक्टर मेहता की

मीठी गोलियों से

दातों का दर्द

सर्दी छींक बुखार

गैस बदहजमी खट्टी ड्कार

सबका इलाज है

डाक्टर मेहता के पास

हाथों में जादू है

डाक्टर मेहता के...

 

मोहल्ले की महिलाएँ

खुलकर कहती हैं

किस्से अपनी परेशानियों के

भीतर के और बाहर के

माँए भेज देतीं हैं

नि:संकोच बेटियों को अपनी

जिनके कद माँओं के बराबर या

हो गए हैं उनसे अधिक

डाक्टर मेहता को

पूरा-पूरा पता होता है

उन बड़ी होती बच्चियों के बारे में

अक्सर उनकी माँओं से अधिक...

 

गेंदा फूल के पँखुड़ियों सी

डाक्टर मेहता के चेहरे पर झुर्रियाँ हैं

जो फ़बती हैं उन पर बहुत...

 

अकेली नहीं है

डाक्टर मेहता

पूरा मोहल्ला उनका अपना है !!

  1. ·  भास्कर चौधुरी