1
जादू
बच्चे का वजन
बमुश्किल किलो से थोड़ा अधिक रहा होगा
अभी विकसित नहीं हुई थी
सर के ऊपर की हड्डियाँ
गिने जा सकते थे
सर पर बाल
रुई के फाहों को गीला कर
टपकाया जाता था दूध
होठों के बीच
आकार में इतना
कि समा जाता
पिता की हथेलियों में
देखा तो
बदले में मुस्कुरा दिया
छलक रहा था
बच्चे की फिक-फिक हँसी में !!
·
2उनका आना
थामना बुढ़ापे को
यह सम्भव नहीं
गिरना बालों का
दातों का झड़ना
गालों का धसना
जारी रहेगा
आखिरी साँस तक
इस बात में ताज़गी नहीं
जो झोंके की तरह
चली आती है
इक खुशबू है
जो उनके आते ही
आस-पास बिखर जाती है !
3
मिड डे मील
ईंटो के
ढेर पर
उकड़ूँ बैठा हुआ बच्चा
कक्षा दूसरी का है
एकटक देख रहा है
उकड़ूँ बैठा हुआ बच्चा
कक्षा दूसरी का है
एकटक देख रहा है
चंद ईंटों को जोड़कर बने चूल्हे
पर रखी है हंडी
हंडी में कई आँखों वाले आलू उबल रहे हैं
नहीं मालूम बच्चे को कि आलू के साथ-साथ
पक रहा है कीटनाशक का ज़हर
जिसे पकाने वाली के बच्चे खायेंगे
वह खायगा और
पर रखी है हंडी
हंडी में कई आँखों वाले आलू उबल रहे हैं
नहीं मालूम बच्चे को कि आलू के साथ-साथ
पक रहा है कीटनाशक का ज़हर
जिसे पकाने वाली के बच्चे खायेंगे
वह खायगा और
कई बच्चे भी..
खाएंगे और मारे जाएंगे
सब के सब
कक्षा के बाहर उसकी कब्र होगी
आस-पास सन्नाटा पसरा होगा
कक्षा के बाहर उसकी कब्र होगी
आस-पास सन्नाटा पसरा होगा
दिन के उजाले में
कक्षा के अंदर चंद किताबें छितरी-बितरी
कक्षा के अंदर चंद किताबें छितरी-बितरी
कब्र पर बिछेगी राजनीति की बिसात
लोग आएंगे सफेदपोश
अपनी-अपनी कारों-जीपों में
पीं-पीं करते
उनके काफिले में शामिल बंदूकधारी
डर उनको शायद
मरने वाले बच्चों की माँएं
उनके सर न फोड़ दे कहीं डंडों से
चल निकलेगा आरोप-प्रत्यारोपों का सिलसिला
भोंपुओं से कभी न पहुँचने वाली राहत की
घोषणाओं की बाढ़ आ जाएगी
आस-पास लोग आँखें और सर नीची कर
सुनने को मज़बूर
जाएँ तो जाएँ कहाँ
काट खाने को दौड़ रहे हैं घर
बगैर बच्चों के सूने
काश ज़हर की पुड़िया ये नेतागण
बाँट आये एक-एक घरों में बेनागा
हाथ जोड़े या न जोड़े फिर भी
पाँच साल बाद मरने वालों के भूतों के वोट पक्के….
लोग आएंगे सफेदपोश
अपनी-अपनी कारों-जीपों में
पीं-पीं करते
उनके काफिले में शामिल बंदूकधारी
डर उनको शायद
मरने वाले बच्चों की माँएं
उनके सर न फोड़ दे कहीं डंडों से
चल निकलेगा आरोप-प्रत्यारोपों का सिलसिला
भोंपुओं से कभी न पहुँचने वाली राहत की
घोषणाओं की बाढ़ आ जाएगी
आस-पास लोग आँखें और सर नीची कर
सुनने को मज़बूर
जाएँ तो जाएँ कहाँ
काट खाने को दौड़ रहे हैं घर
बगैर बच्चों के सूने
काश ज़हर की पुड़िया ये नेतागण
बाँट आये एक-एक घरों में बेनागा
हाथ जोड़े या न जोड़े फिर भी
पाँच साल बाद मरने वालों के भूतों के वोट पक्के….
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4
पत्नी से
प्रेम
मैं चाहता
हूँ
पढ़ो तुम मुझे
पढ़ो पर उतना
ही
जितना ज़रूरी
हो
प्रेम के लिए
!!
· भास्कर चौधुरी
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