Tuesday, 18 February 2014

कविताएँ


1
जादू

बच्चे का वजन

बमुश्किल किलो से थोड़ा अधिक रहा होगा

अभी विकसित नहीं हुई थी

सर के ऊपर की हड्डियाँ

गिने जा सकते थे

सर पर बाल

 
रुई के फाहों को गीला कर

टपकाया जाता था दूध

होठों के बीच

आकार में इतना

कि समा जाता

पिता की हथेलियों में

 
आज छः माह बाद

देखा तो

बदले में मुस्कुरा दिया

 
नानी और दादी के हाथों का जादू

छलक रहा था

बच्चे की फिक-फिक हँसी में !!   

·     
2
उनका आना

थामना बुढ़ापे को

यह सम्भव नहीं
 

गिरना बालों का

दातों का झड़ना

गालों का धसना

जारी रहेगा

आखिरी साँस तक

इस बात में ताज़गी नहीं


पर ताज़ी है हवा

जो झोंके की तरह

चली आती है

इक खुशबू है

जो उनके आते ही 

आस-पास बिखर जाती है !
 
3
मिड डे मील
ईंटो के ढेर पर
उकड़ूँ बैठा हुआ बच्चा
कक्षा दूसरी का है
एकटक देख रहा है

चंद ईंटों को जोड़कर बने चूल्हे
पर रखी है हंडी
हंडी में कई आँखों वाले आलू उबल रहे हैं
नहीं मालूम बच्चे को कि आलू के साथ
-साथ
पक रहा है कीटनाशक का ज़हर
जिसे पकाने वाली के बच्चे खायेंगे
वह खायगा और
कई बच्चे भी..
खाएंगे और मारे जाएंगे
सब के सब

कक्षा के बाहर उसकी कब्र होगी
आस
-पास सन्नाटा पसरा होगा
दिन के उजाले में
कक्षा के अंदर चंद किताबें छितरी
-बितरी

कब्र पर बिछेगी राजनीति की बिसात
लोग आएंगे सफेदपोश
अपनी
-अपनी कारों-जीपों में
पीं
-पीं करते
उनके काफिले में शामिल बंदूकधारी
डर उनको शायद
मरने वाले बच्चों की माँएं
उनके सर न फोड़ दे कहीं डंडों से
चल निकलेगा आरोप
-प्रत्यारोपों का सिलसिला
भोंपुओं से कभी न पहुँचने वाली राहत की
घोषणाओं की बाढ़ आ जाएगी
आस
-पास लोग आँखें और सर नीची कर
सुनने को मज़बूर
जाएँ तो जाएँ कहाँ
काट खाने को दौड़ रहे हैं घर
बगैर बच्चों के सूने
काश ज़हर की पुड़िया ये नेतागण
बाँट आये एक
-एक घरों में बेनागा
हाथ जोड़े या न जोड़े फिर भी
पाँच साल बाद मरने वालों के भूतों के वोट पक्के….
·        
4
पत्नी से प्रेम
मैं चाहता हूँ
पढ़ो तुम मुझे
 
पढ़ो पर उतना ही
जितना ज़रूरी हो
प्रेम के लिए !!
 ·       भास्कर चौधुरी


 
 
 
 
 
 
 
 

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